कोरोना मुक्त बिहार और आनेवाला चुनाव

चुनाव क्या है ? चुनाव एक ऐसा प्रसंग है जिसके आने के बाद सारे प्रसंग कहीं खो जाते है या जानबूझकर बाकि सारे प्रसंगों को भुला दिया जाता है ताकि चुनाव की गरिमा बनी रहे और नेता जी का ध्यान कहीं और न भटक जाए।

कोरोना मुक्त बिहार और आनेवाला चुनाव

बिहार अब कोरोना मुक्त हो गया है क्योंकि वहां अब चुनाव आ गया है। चुनाव क्या है ? चुनाव एक ऐसा प्रसंग है जिसके आने के बाद सारे प्रसंग कहीं खो जाते है या जानबूझकर बाकि सारे प्रसंगों को भुला दिया जाता है ताकि चुनाव की गरिमा बनी रहे और नेता जी का ध्यान कहीं और न भटक जाए। क्योंकि नेताजी चुनाव के टाइम में कुछ और करने लगेंगे तो प्रचार कौन करेंगे। चुनाव की तैयारी भी तो करनी है। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के लिए हर चौक चौराहे में एलसीडी टीवी लगवाना है, केबल टीवी का कनेक्शन भी डलेगा और ये भी ध्यान रखना है की कोई चोरी कर के उसपे टीवी का कोई और कार्यक्रम न देख ले। दिल्ली में बैठे हुए बड़े बड़े नेताओं के भाषण सुनने के लिए लोगो को भी एकत्रित करना है। आखिर एलसीडी पे भाषण देखने और सुनने वाला भी तो कोई होना चाहिए न। इतना कुछ करना है नेता जी को, और वो भी  इतने कम समय में। वैसे ये सब एलसीडी लगाने का और सब जगह कनेक्शन लगाने का कितना खर्च आएगा ? एक बार अंदाज़ा लगा के देखिएगा। सायद उतने में लोगो की गरीबी और भुखमरी तो मिट ही सकती है इस कोरोना के काल में। पर गरीब देश में अब बचे कहाँ है भाई, 2014 के बाद से तो कोई गरीब रहा ही नहीं इस देश में। वैसे  इतने पैसे में तो बहुत रोजगार भी खुल सकते हैं, पर बेरोजगार भी तो नहीं बचा है अब कोई 2014 के बाद से। जो बेरोजगार बचे थे वो भक्त बन गए और आईटी सेल ज्वाइन कर के सोशल मिडिया पे भक्ति कर रहें हैं। पर ये प्रवासी मजदूर कौन है ? अच्छा हाँ ये तो मजदूर हैं बेरोजगार कहाँ हैं।

तो यही हाल अभी बिहार का हैं।  बिहार के लोगों को लगता है की दिल्ली और मुंबई में रोजाना कितने कोरोना के केस आ रहे हैं उस हिसाब से तो भाई हमारा बिहार बहुत बढ़िया है। यहाँ तो अब कोई केस ही नहीं आ रहे है और आ भी रहे है तो समाचार माध्यम में नहीं दिखा रहे है। वैसे आज के युग में समाचार माध्यम क्या है ? जैसे पहले था वैसे ही है या कुछ बदलाव हुआ है ? समाचार माध्यम एक ऐसा माध्यम है जिसको देखने के बाद हो सकता है आपका रक्त संचार बढ़ जाए अगर आप 9 बजे रात का रिपब्लिक टीवी के एंकर को देख रहे हो तो। या ये भी हो सकता है की आपका देशभक्ति एकाएक जग जाए और आप पाकिस्तान में तबाही मचाने का सोचने लगे अगर आप ज़ी न्यूज़ का 9 बजे रात वाला डीएनए देख रहे हो तो। या हो सकता है आप दक्षिण कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन के बारे में सोच के गुस्सा हो रहे हो और उसको गली दे रहे हो अगर आप ABP न्यूज़ के 9 बजे रात वाला कार्यक्रम देख रहे हो तो। या फिर ये भी हो सकता है आप चीन या पाकिस्तान से दो दो हाथ करने के लिए तैयार हो अगर आप आजतक का 9 बजे रात वाला कार्यक्रम देख रहे हो तो। अब कितना बताए ऐसे बहुत सारे कार्यक्रम है जो आपको अच्छे से समझा देगा की समाचार माध्यम के मध्य में कुछ है भी या ऐसे ही आपका कटा जा रहा है।

नितीश जी भी चुनाव की तैयारी में लग गए है। कोरोना भी हो सकता है चुनाव में वोट गिराने जाएगा इसलिए वो भी चुप है। क्योंकि जनता भी वोट देती है लेकिन अपने नेताओं से कुछ पूछती नहीं है। सायद इसीलिए अब सबको कोरोना मुक्त बिहार नज़र आ रहा है। पर क्या कोई महानुभाव ये पूछने का कष्ट करेंगे की रोजाना कितनी जाँच हो रही है बिहार में और रोजाना कितने कोरोना पॉजिटिव मिल रहे है। जाँच हो भी रही है या सब हवा में ही है। सायद कोई नहीं पूछेगा। अभी चुनाव है भाई अब सब चुनाव के बाद। हाँ कही टूटी हुई रोड दिखेगी या नाला खुला दिखेगा उसको हो सकता है नेता जी बनवा दे क्योंकि बिहार में चुनाव जो आनेवाला है। पर चुनाव में मतदान कौन करेगा ? प्रवासी मजदूर ? पर वो प्रवासी मजदूर मतदान करेगा किसको नितीश जी को या लालू पुत्र को ? एक नेता जी ने तो अपने बिहार के प्रवासी मजदूर और विद्यार्थी को भुला ही दिए थे, बिहार में लाने तक को राज़ी नहीं थे। जब खूब थू थू होने लगी तो मज़बूरी थी लाने की। लाते नहीं तो क्या करते। और जब आ गए है तो फिर वही प्रवासी मजदूर वापस जा रहे है क्योंकि उनको रोजगार कौन देगा। लगता है इन प्रवासी मजदूरों को अभी तक ये समझ में नहीं आया की बिहार में नेता बनना ही सबसे बड़ा रोजगार है। एक बार नेता जी बन जाओ फिर देखो कैसे पैसे आते है घर में, बोरी भर के। है की नहीं।

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एक आदमी से हमने पूछा की भाई बिहार में रहते हो कोई रोजगार नहीं है वहां, आगे क्या करने का विचार है। तो वो बोला, कुछ नहीं आईएएस का तैयारी कर रहे है। मैंने कहा ये तो बहुत अच्छी बात है लेकिन एक बात बताओ भाई अगर आईएएस नहीं निकला तो क्या करोगे। तो वो बोला आईएएस नहीं निकलेगा तब 2 बन्दूक ले लेंगे। हम डर गए उससे पूछे काहे भाई, आईएएस से सीधा बन्दूक पे कैसे आ गए। तो वो बोला अरे बन्दूक ले लेंगे तो कुछ क्राइम हो ही जाएगा हमारे हाथों फिर कुछ दिन में नेता तो बन ही जाएंगे। और एक बार नेता बन गए फिर आईएएस को अपना बॉडीगार्ड में रखेंगे न समझे की नहीं। हमने कहा हाँ जी नेता जी समझ गए, आपके लक्षण आईएएस वाले तो नहीं लग रहे है आपको नेता की कुर्सी मुबारक हो।

खैर तो हम बात कर रहे थे कोरोना मुक्त बिहार की। एक बार अपने नजदीकी या हो सके तो अपने विधायक जी या अपने वार्ड पार्षद से पूछ लीजिएगा की आज कितना टेस्ट हुआ। विधायक जी को देखे होंगे पहले से कभी तभी पूछिएगा क्योंकि बिहार में जनता के बीच नेता जी कम दिखाई देते है। और अगर बता दे तो यहाँ कमेंट में हमें भी बता दीजिएगा। ऐसे पता नहीं चलता है क्योंकि समाचार माध्यम में तो कभी पाकिस्तान कभी चीन तो कभी किम जोंग-उन आ जाता है। कभी कभी लगता है सब से एक बार जा के पर्सनली लड़ लिया जाए।

वैसे ऊपर दिए हुए कथनो को उत्तर प्रदेश और बाकि राज्यों वाले भी सामान तरीके से पढ़े और अपने यहाँ के बारे में भी सोचे और हो सके तो थोड़ा खुश हो जाए की वहाँ  चुनाव नहीं है।

।।।जय हिन्द।।।